इसा पूर्व ३२० – उत्तिष्ठ भारत:। इसा २०१६ – उत्तिष्ठ “Indian”।


हम से भाग्य शाली है वे जिन्होने इस धारा पर जन्म लिया, जहां स्वर्ग और मुक्ती का द्वार है। ईश्वर भी इन्ही शब्दोमे भारत वर्ष कि महिमा का गान करते है। 

  • पवित्रता त्याग और साहसीयों की भूमी,
  • ज्ञान विज्ञान कला व्यापार व औषधीयोसे परिपूर्ण भूमी,
  • हमारे पूर्वजो कि कर्म भूमी, 
  • जहा दानवी शक्तीयो को दैवी शक्तीयो ने पराजित किया।
  • उत्तुंग शिखरो व सुंदर वनो से आच्छादित भूमी, 
  • पवित्र आनंद शौर्य उत्सर्ग राष्ट्रभक्ती (आदी) श्रेष्ठ गुणो व दया के लिये प्रसिद्ध भूमी, 
  • स्वर्ग से भी श्रेष्ठ भारत भूमी,

और उसी भारत भूमी के उत्थान के लिये अपना सर्वस्व समर्पित करने कि भावना के साथ मा भारती के पुत्र आज अपनी अपनी जन्मभूमी वापस जायेंगे।

पर मै आज यहा से किसी मागध, किसी मालव, किसी लिच्छवी किसी कुरु किसी पांचाल को नही जाने दुंगा, आज यहा से सिर्फ भारतीय जायेगा।

अनेक प्रकार की भाषा बोलने वाले और अनेक प्रकार के धर्मे को धारण करने वाले जन समूहो को भारत भूमी एक घरमे निवास करने वाले सहोदरो के समान धारण करती है। हमारी मातृभूमी राजनैतिक रुपसे अनेक महाजनपदो में बटी अवश्य है पर सांस्कृतिक रूप से वह एक है। एक ही संस्कृती के प्रवाह में मा भारती के पुत्र पल्लवीत हो रहे है। तो जनपदो कि सीमाए उन्हे कैसे बाट सकती है। मै सावधान कर रहा हुं मेरे सामने बैठे भरतपुत्रो को कि जनपदो कि सीमाओं कि आधार पर भारतीयो को बाटने का प्रयास न करे।

संस्कृती के उस सूत्र को संभाल कर रखना जो मानव को मानव से जोडता है। क्यु की देख रहा हुं कि जनपदो कि राजनीती मानव को मानव से तोड रही है। अत: राजनीती के उस दायित्व का निर्वाह अब संस्कृति को करना होगा, संस्कृति को ही सेतू बनाना होगा। 


क्युंकी संस्कृति कोई भाषा नाही संस्कृति कोई जाती नाही है संस्कृति कोई धर्म नाही।

भारतीय अध्यात्म तो दावे के साथ कहता है कि मानव का ईश्वर से एकाकार निश्चित है। पर उससे पहले मानव का मानव से एकाकार तो हो… क्या जनपदो कि सीमाए मानव को मानव से मिलने से रोक सकती है? और यादी ऐसा है तो उन सीमा रेखांओ को मिटाना है जो हमारे हृदयो पर अंकित है। 

जो स्नातक यहा से जाये जो जितने जोर से हो सके गाये हमारी सांस्कृतिक एवं राष्ट्रीय एकता का स्वर, समवेत स्वर… ताकी गुरुकुल के आचार्यो को विश्वास हो के उन्हो ने एक राष्ट्र का निर्माण किया है उसे खंड खंड में बाटा नही है।

मा भारती तुम्हारा मार्ग प्रशस्त करे, उत्तिष्ठ भारत:।

Following current Uri Attacks and rapid spread of diplomatic 

यावर आपले मत नोंदवा